नई दिल्ली। 1 अप्रैल से Census 2027 का पहला चरण शुरू होने जा रहा है। इस बार जनगणना का तरीका पहले से काफी अलग होगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी और मकानों की गिनती में जियो-रेफरेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि हर घर की लोकेशन सीधे डिजिटल मैप पर दर्ज हो सके। सरकार की मानें तो इससे न तो कोई मकान छूटेगा और न ही किसी घर की गिनती दो बार होगी।
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इस प्रश्नावली को 2011 की पिछली जनगणना के बाद भारतीय समाज में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें घर के प्रकार, स्थान और संरचना से जुड़े सवालों के साथ-साथ डिजिटल युग को देखते हुए इंटरनेट सुविधा की उपलब्धता पर भी नया सवाल शामिल किया गया है।इसके अलावा एलपीजी, पीने के पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच को लेकर भी जानकारी ली जाएगी।

प्रश्नावली में स्वच्छता और बुनियादी ढांचे से जुड़े पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें शौचालय की उपलब्धता, गंदे पानी की निकासी व्यवस्था और नहाने की सुविधाओं से जुड़े सवाल शामिल हैं। साथ ही घरों में खाए जाने वाले मुख्य अनाज के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी, जिससे खाद्य सुरक्षा और क्षेत्रीय खान-पान के पैटर्न को समझने में मदद मिलेगी।
हालांकि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या फिर जरूरी जानकारी को छुपाता है तो इसे अधिनियम की धारा 11 के तहत दंडनीय अपराध माना जाता है। कानून के मुताबिक ₹1000 तक का जुर्माना, 3 साल तक की कैद या दोनों का प्रावधान है। बता दें जानकारी देने से मना करना या फिर किसी जनगणना अधिकारी के काम में बाधा डालना भी दंडनीय है। नियमों के उल्लंघन पर जनगणना अधिकारी को भी जेल की सजा भी हो सकती है।
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