नई दिल्ली। साल 2026 में देश 77वां Republic Day मनाने जा रहा है। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड की तैयारियां अब आखिरी दौर में पहुंच चुकी हैं। 26 जनवरी की शुरुआत देश के राष्ट्रपति द्वारा तिरंगा फहराने के साथ होती है। वैसे तो 15 अगस्त और 26 जनवरी दोनों ही दिनों देश भर में राष्ट्रीय ध्वज लहराया जाता है, लेकिन इन दोनों मौकों पर झंडा फहराने के नियम अलग-अलग होते हैं।
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15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस को ध्वजारोहण होता है। इसी दिन साल 1947 में ब्रिटिश राज का झंडा भारत में नीचे उतारा गया था और देश का राष्ट्रीय ध्वज ऊपर चढ़ाया गया था। जब राष्ट्रीय ध्वज को ध्वज स्तंभ पर नीचे से ऊपर की ओर चढ़ाया जाता है तो इसे ध्वजारोहण कहते हैं।
26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस को झंडा फहराया जाता है जोकि फ्लैग पोल पर पहले से ही ऊपर लगाकर बंधा हुआ होता है। आम तौर पर कई जगह इसके साथ कुछ फूल की पंखुडियां भी बांधी जाती हैं ताकि पुष्प वर्षा के साथ झंडा फहराया जाए।

15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार भारत का तिरंगा झंडा लाल किले की प्राचीर पर ब्रिटिश झंडे को नीचे उतार कर ऊपर चढ़ाया गया था और तब से हर साल लाल किले पर ही ध्वजारोहण किया जाता है।
26 जनवरी को राष्ट्रपति भवन के पास कर्तव्य पथ (पुराना नाम राजपथ) पर झंडा कार्यक्रम होता है जहां पर परेड की शुरुआत से पहले झंडे को फहराया जाता है।
भारतीय ध्वज संहिता 2002 कहती है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी भी संस्था से जुड़ा हो या ना हो, राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है। सूर्यास्त के बाद तिरंगा नहीं फहराया जा सकता है।
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