लखनऊ। दुनिया भर में World Autism Awareness Day मनाया जा रहा है। इस दिन ऑटिज्म के प्रति लोगों को जागरुक किया जाता है। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ के जानकीपुरम में जनमानस को ऑटिज्म के प्रति जागरुक किया गया। साथ ही किफायती थेरेपी और सामुदायिक पहुंच से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की गईं। बता दें कि द होप रिहैबिलिटेशन एंड लर्निंग सेंटर द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।
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निदेशक दिव्यांशु कुमार ने बताया कि 100 से अधिक बच्चों को मुख्यधारा में लाना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि यह 100 परिवारों की बदली हुई जिंदगी है। आर्थिक स्थिति किसी बच्चे के भविष्य की राह में दीवार नहीं बनेगी, वहीं निदेशक एवं पीडियाट्रिक फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. प्रीति कुरील ने कहा कि Early Intervention सिर्फ एक Clinical Decision नहीं, यह एक बच्चे को उनका जीवन लौटाने का अवसर है।

इसके अलावा, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. वेद प्रकाश ने कहा कि जब बच्चा पहली बार खुद अपना बैग उठाकर स्कूल जाता है, तो उस दिन सिर्फ बच्चा नहीं, पूरा परिवार बदलता है। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं ABA थेरेपिस्ट जॉन विलियम ने बताया कि हमारी अप्रोच हमेशा बच्चे की स्ट्रेंथ से शुरू होती है। अपने बच्चे की अलग सोच को बोझ मत समझिए, यह उसकी पहचान है।
द होप की पहल एवं घोषणाएं-
- किफायती थेरेपी- जरूरतमंद परिवारों को थेरेपी सेवाएं रियायती दरों पर दी जाएंगी। सरकारी व सामुदायिक सहयोग से लागत 50–70% तक कम करने का लक्ष्य है।
- Hope on Wheels- मोबाइल थेरेपी वैन आसपास के कस्बों व वंचित क्षेत्रों तक पहुंचेगी। स्कूलों, अस्पतालों व आंगनवाड़ियों में निःशुल्क Assessment Camps आयोजित होंगे।
- Hope Helpline- मई 2026 से समर्पित टोल-फ्री हेल्पलाइन, न्यूरोडायवर्स बच्चों के परिवारों व देखभालकर्ताओं के लिए Assessment, थेरेपी व भावनात्मक सहयोग के लिए।
- भविष्य की योजनाएं- वर्ष 2026 के अंत तक 5 नई शाखाएं खोली जाएंगी। The Hope Global Play School का विस्तार कर और अधिक बच्चों को School Readiness Program से जोड़ा जाएगा।
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