एंटरटेनमेंट डेस्क। हिंदी सिनेमा में बोलती हुई फिल्मों का चलन शुरू हुआ, तब मास्टर निसार एक्टर हुआ करते थे। वो एक एक्टर और सिंगर थे। उस दौर में एक्टर्स के नाम पर महज कुछ ही लोग सिनेमा का हिस्सा थे और उनमें से एक नाम मास्टर निसार (Master Nissar) का था। मास्टर निस्सार को बोलती फिल्मों के दौर का पहला सुपरस्टार माना जाता है।
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जब मास्टर निसार 10 साल के थे तो वो भोपाल आ गए और उन्होंने अपने अंकल की कंपनी ज्वॉइन कर लिया और थिएटर का हिस्सा रहे। करियर की शुरूआत में उन्होंने लड़कियों के किरदार निभाए। मास्टर निसार और जहां आरा की जोड़ी इतनी हिट रही कि दोनों ने साथ कई फिल्में तो की ही साथ ही इनको पसंद करने वालों की फेहरिस्त भी बढ़ती गई। दोनों ने साल इंद्रसभा (1932) में काम किया। यह फिल्म इनके करियर की ब्लॉकबस्टर फिल्म थी।

1930 के दशक के शुरुआती सालों में मास्टर निसार काफी महंगे कलाकारों में से एक थे। कहा जाता है कि, भाववानी प्रोडक्शंस के साथ उनका करार था और उन्हें प्रोड्क्शन की तरफ से 3000 रुपये प्रति माह की मोटी रकम पर रखा गया। ये मास्टर निसार के स्टारडम का ही नतीजा था कि उन्हें इतनी महंगी फीस मिल रही थी।
कहा जाता है कि मास्टर निसार को फिल्मों में एक्टिंग और गायिकी के अलावा मालिश करना आता था। अंतिम दिनों में उन्हें जूते पॉलिश करते हुए भी देखा गया। मास्टर निसार ने चार शादियां की थीं, जिनमें कोई छोड़कर गई तो किसी का निधन हो गया। ये दुर्दशा ही है कि जो कभी सुपरस्टार रहा, कभी जिसके पास रॉल्स रोयस जैसी कार थी, उसके अंतिम कमाठीपुरा की चॉल में बीते और यहीं उन्होंने अंतिम सांसें लीं।
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