नई दिल्ली। हाल ही में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (schemes) का नाम बदलकर विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन कर दिया गया। सरकार इसे नए भारत की जरूरतों के अनुरूप कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे रीब्रांडिंग की राजनीति कह रहा है। आइए जानें की इस सरकार में आखिर कितने नाम बदले जा चुके हैं?
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ग्रामीण इलाकों में घर देने वाली इंदिरा आवास योजना को 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण बना दिया गया। मकसद नहीं बदला, लेकिन नाम से राजनीतिक हस्ताक्षर जुड़ गया। इसी तरह शहरी विकास के लिए जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन की जगह अमृत योजना लाई गई। बिजली पहुंचाने वाली राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में समाहित किया गया।
महिला आरक्षण कानून को नारी शक्ति वंदन अधिनियम नाम दिया गया। उच्च शिक्षा से जुड़े नए कानून और परमाणु ऊर्जा सुधारों के बिल भी आकर्षक हिंदी नामों के साथ पेश किए गए। इन नामों में ‘विकसित भारत’ और ‘नारी शक्ति’ जैसे शब्द सरकार के राजनीतिक नैरेटिव को मजबूत करते हैं।

सिर्फ योजनाएं ही नहीं, मंत्रालयों की पहचान भी बदली गई। मानव संसाधन विकास मंत्रालय फिर से शिक्षा मंत्रालय बना। जहाजरानी मंत्रालय को बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय कहा जाने लगा। सरकार का तर्क है कि इससे मंत्रालयों का काम और दायरा साफ होता है। आलोचकों का कहना है कि यह प्रतीकात्मक राजनीति का हिस्सा है।
सबसे बड़ा बदलाव आपराधिक कानूनों में देखने को मिला। IPC, CrPC और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए। गृह मंत्री अमित शाह ने इसे उपनिवेशवाद से मुक्ति का कदम बताया।
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