नई दिल्ली। 1947 का बंटवारा सिर्फ दो देशों का नहीं था बल्कि संसाधनों, संस्थानों और ताकत का भी partition था। आजादी की खुशी के बीच भारत ने कई ऐसे नुकसान झेले, जिनका असर सालों तक रहा। बहुत सी अहम चीजें ऐसी थीं, जो भारत के काम आ सकती थीं लेकिन हालात और फैसलों के चलते पाकिस्तान के हिस्से में चली गईं।
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भारत और पाकिस्तान का बंटवारा सिर्फ नक्शे पर लाइन खींचने तक सीमित नहीं था। इसके साथ सेना, पैसा, पानी, रेलवे, बंदरगाह और कारखानों तक का बंटवारा किया गया। कागजों पर सब कुछ तय था लेकिन जमीनी हालात में भारत को कई मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ा। ब्रिटिश भारत की सेना का बंटवारा तय अनुपात में होना था।
पाकिस्तान को कुल सैन्य संसाधनों का करीब 17 प्रतिशत मिलना था लेकिन व्यवहार में पाकिस्तान को जरूरत से ज्यादा हथियार, गोला-बारूद और सैन्य ढांचा मिला। कई अहम छावनियां और हथियार डिपो पाकिस्तान के हिस्से में चले गए। आजादी के तुरंत बाद जब भारत को कश्मीर संकट का सामना करना पड़ा, तब सैन्य संसाधनों की कमी साफ नजर आई।

पंजाब की ज्यादातर नहरों के हेडवर्क पाकिस्तान के इलाके में चले गए, जबकि खेतों का बड़ा हिस्सा भारत में था। इससे भारत के किसानों को शुरुआती वर्षों में भारी परेशानी हुई। पानी की सप्लाई को लेकर तनाव बढ़ा और आखिरकार 1960 में सिंधु जल समझौता करना पड़ा। कई महत्वपूर्ण रेलवे लाइनें, वर्कशॉप और इंजन पाकिस्तान के हिस्से में चले गए। ब्रिटिश भारत का सबसे बड़ा और आधुनिक बंदरगाह कराची था, जो पाकिस्तान को मिला। कपास उगाने वाले ज्यादातर इलाके पाकिस्तान में चले गए, जबकि कपड़ा मिलें भारत में रह गईं। कई मंत्रालयों से जुड़ी फाइलें, नक्शे और प्रशासनिक ढांचा पाकिस्तान को सौंपा गया।
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