25 C
Lucknow
Tuesday, February 10, 2026

बिना अधिकार किताब छापना है गुनाह, जानें कितनी मिलती है इसकी सजा

नई दिल्ली। पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की संस्मरणात्मक किताब को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर व्हाट्सएप पर book की कथित पीडीएफ फाइल शेयर होने की बात सामने आई है। इसके अलावा कुछ वेबसाइट्स पर भी यह किताब उपलब्ध होने की जानकारी मिली, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

यह भी पढ़ें-संसद में क्यों उठा किताबों का विवाद, निशिकांत दुबे कौनसी किताबें लेकर पहुंचे?

इसी बीच हम आपको बताते हैं कि कॉपीराइट का उल्लंघन क्या है? बिना लेखक या पब्लिशर की अनुमति के किसी किताब को छापना, स्कैन करना, पीडीएफ बनाना या शेयर करना कॉपीराइट उल्लंघन कहलाता है। भारत में कॉपीराइट कानून लेखक और प्रकाशक को यह अधिकार देता है कि उनकी रचना का इस्तेमाल कौन, कब और कैसे कर सकता है। किताब चाहे पूरी हो या कुछ पन्नों की, प्रिंट हो या डिजिटल, बिना इजाजत उसका वितरण कानूनन अपराध है।

भारत में कॉपीराइट अधिनियम, 1957 इस तरह के मामलों को स्पष्ट रूप से अपराध मानता है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी किताब को बिना अनुमति छापता, बेचता या बांटता है, तो उसे 6 महीने से लेकर 3 साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ ही उस पर 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

अगर उल्लंघन बार-बार किया गया हो या बड़े पैमाने पर हो तो सजा और भी कड़ी हो सकती है। एक बार पीडीएफ या ई-बुक लीक हो जाए, तो वह मिनटों में हजारों लोगों तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि कानून डिजिटल कॉपी को भी उतना ही गंभीर मानता है जितना प्रिंटेड किताब को। जनरल नरवणे की किताब के मामले में भी यही बात सामने आई है।

Tag: #nextindiatimes #GeneralNaravaneBook #RahulGandhi #Copyright

RELATED ARTICLE

close button