डेस्क। राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर जब पूरे देश में युवाओं की भूमिका, उनके भविष्य और उनकी दिशा पर चर्चा हो रही है, तब पश्चिम बंगाल के हावड़ा में स्थित बेलुर मठ एक अलग ही मिसाल पेश करता नजर आता है। यह वही पवित्र स्थान है, जिसे Swami Vivekananda ने स्थापित किया था। यहां आज भी युवाओं को उनके आदर्शों, विचारों और जीवन मूल्यों से जोड़ने का काम किया जा रहा है।
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इस मठ के मुख्य प्रांगण में स्वामी रामकृष्ण परमहंस, शारदा देवी, स्वामी विवेकानंद और स्वामी ब्रह्मानन्द की समाधियाां व मंदिर बने हैं। बेलुर मठ की सबसे खास बात यह है कि यहां युवाओं को ही संन्यासी बनाया जाता है। संन्यासी बनने के लिए उम्र 28 साल से कम होना जरूरी है और उम्मीदवार का ग्रेजुएट होना अनिवार्य है। मठ का मानना है कि युवा उम्र में लिया गया संकल्प जीवन भर समाज और देश के लिए मजबूत आधार बनता है।

इस मंदिर का निर्माण 28 जनवरी 1924 को पूरा हुआ ये मंदिर दो मंजिला है, ऊपरी मंजिल में संगमरमर से बना ओम का प्रतीक है जो कि बांग्ला में लिखा गया है। ये मंदिर ठीक उसी जगह पर बना है जहां स्वामी विवेकानंद का अंतिम संस्कार हुआ था। मंदिर के बगल में एक बेल का पेड़ है जिसके नीचे स्वामी विवेकानंद अक्सर बैठा करते थे।
बेलूर मठ तैयार होने से पहले मां सारदा देवी यहां कई बार ठहरी थी। अपनी नयी जगह पर आने से पहले रामकृष्ण मठ 13 फरवरी 1898 से 1 जनवरी 1899 तक इसी बिल्डिंग में था। मंदिर में शाम के समय आरती शुरू होने से पहले एक घंटी बजायी जाती है ताकि लोग आरती के वक्त रामकृष्ण मंदिर के वक्त कहीं और ना जाये।
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