स्पोर्ट्स डेस्क। राजस्थान रॉयल्स के विरुद्ध 154.2 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले गुजरात टायटंस के तेज गेंदबाज Ashok Sharma का सपना भारत के लिए क्रिकेट खेलने का है। जयपुर के पास रामपुरा गांव के रहने वाले अशोक बचपन में अपने बड़े भाई को टेनिस गेंद से गेंदबाजी करते थे और उनके पास स्पाइक शूज तक नहीं थे।
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अशोक की सफलता में उनके कोच विवेक का बहुत बड़ा हाथ है, जिनका कोविड के दौरान निधन हो गया था। अशोक लखनऊ सुपरजायंट्स के बल्लेबाज मुकुल के साथ विवेक की अरावली क्रिकेट क्लब अकादमी में अभ्यास करते थे। उनके पास क्रिकेट के स्पाइक शूज नहीं थे, तो उनके कोच ने अकादमी में सीनियर आकाश सिंह जो अंडर-19 विश्व कप खेले हैं, उनसे लेकर उन्हें दो जोड़ी स्पाइक शूज दिलाए।

ये वही खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 3 साल पहले क्रिकेट छोड़कर सरकारी नौकरी करने का मन बना लिया था। U-23 लेवल पर मौके नहीं मिलते देखकर वो सरकारी नौकरी के लिए होने वाले परीक्षाओं की तैयारियों में जुट गए थे। उन्होंने खेतों में अपने पिता का हाथ बंटाना शुरू कर दिया था लेकिन उसी दौरान इस किसान के बेटे के क्रिकेट करियर के लिए संजीवनी बना टैलेंट हंट।
टैलेंट हंट के आयोजकों ने उन्हें एक गेंद डालने का मौका दे दिया। मौका मिला तो अशोक शर्मा चप्पल में थे। उन्होंने जूता भी नहीं पहन रखा था लेकिन उसकी परवाह ना करते हुए उन्होंने चप्पल में ही गेंद फेंकने का फैसला किया। चप्पल पहने अशोक शर्मा ने 140 KM/H की रफ्तार से वो गेंद डाली और फिर उनकी दुनिया ही पलट गई। अशोक शर्मा ने उस एक घटना के बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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