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Sunday, March 15, 2026

मोची-नाई और धोबी कहने पर खैर नहीं! देखें कितनी मिलती है सजा

डेस्क। उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने पीएम विश्वकर्मा योजना के संबंध में एक बड़ी सिफारिश की है। समिति का कहना है कि भारत में कई पारंपरिक व्यवसायों को अभी भी जाति के नजरिए से देखा जाता है। इसी सोच की वजह से समिति का ऐसा मानना है कि इन व्यवसायों का वर्णन करने के तरीके में बदलाव की जरूरत है।

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रिपोर्ट में संसदीय समिति ने इस बात पर जोर दिया है कि कई पारंपरिक पेशों के नाम जैसे मोची, नाई और कुम्हार देश के अलग-अलग हिस्सों में आमतौर पर खास जाति की पहचान से जुड़े होते हैं। इसी जुड़ाव की वजह से कुछ लोग इन पेशों से अपनी पहचान बताने में हिचकिचाते हैं या फिर पीएम विश्वकर्म योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करने से बचते हैं।

अभी ऐसा कोई खास कानून नहीं है जो हर संदर्भ में मोची, नाई या फिर धोबी जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाता हो। हालांकि अगर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किसी की जातिगत पहचान के आधार पर उसका अपमान या उसे नीचा दिखाने के लिए किया जाता है तो यह काम अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 के तहत आ सकता है।

इस कानून की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत किसी सार्वजनिक जगह पर अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी व्यक्ति को उसकी जाति के नाम से बुलाकर जानबूझकर अपमानित करना या नीचा दिखाना एक अपराधिक अपराध माना जाता है। ऐसे अपराध के लिए सजा (Punishment) 6 महीने से लेकर 5 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकती है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सिर्फ किसी जाति के नाम का उल्लेख करना अपने आप में कोई अपराधिक अपराध नहीं है।

Tag: #nextindiatimes #Punishment #IPC

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