डेस्क। सनातन धर्म में महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) के पर्व का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान शिव और मां पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवसर पर शिव पूजन करने से वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होता है और घर में सुख-शांति का वास होता है। इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी।
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भगवान शिव भस्म, रुद्राक्ष और सांपों को अपने आभूषण के रूप में धारण करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर भगवान शिव गले में क्यों धारण करते हैं सांप? चलिए जानते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार नागों के राजा वासुकी को शिव जी अपने गले में धारण करते हैं। वासुकी भगवान शिव के अनंत भक्त थे। वासुकी की इच्छा थी कि वह हमेशा महादेव के समीप रहे। समुद्र मंथन के समय महादेव ने जब’ हलाहल’ विष पिया था। वासुकी ने भी उस विष के प्रभाव सहने में महादेव ने मदद की थी।

शिव जी वासुकी की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें हमेशा के लिए अपने गले ने आभूषण के रूप में धारण करने का वरदान दिया। तभी से वासुकी अमर हो गए। इसलिए भगवान शिव अपने गले में सांप को धारण करते हैं। भगवान शिव और सांप के संबंध का वर्णन शिव पुराण, स्कंद पुराण में किया गया है।
भगवान शिव के संग सांप की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष है, तो ऐसे में सोमवार या महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से राहु-केतु शांत होते हैं और कालसर्प दोष की समस्या दूर होती है।
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