एजुकेशन डेस्क। SWAT यूनिट्स एलीट फोर्स है और बाहर से कोई भी सीधी भर्ती नहीं होती। सिर्फ वही लोग जो पहले से पुलिस फोर्स में काम कर रहे हैं SWAT कमांडो बनने का सपना देख सकते हैं। उम्मीदवारों को पहले रेगुलर पुलिस ट्रेनिंग को पूरा करना होता है और कुछ साल एक्टिव ड्यूटी में काम करना होता है।
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सिलेक्शन प्रोसेस काफी सख्त स्क्रीनिंग से शुरू होता है। उम्मीदवारों को उनके सर्विस रिकॉर्ड, अनुशासन, फिजिकल कंडीशनिंग और मेडिकल फिटनेस के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाता है। सिर्फ वही लोग जिनका रिकॉर्ड साफ है और जिनका परफॉर्मेंस लगातार अच्छा रहा है, वह अगले स्टेज में जाते हैं जहां से असली परीक्षा शुरू होती है।
शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को कड़ी फिजिकल और साइकोलॉजिकल जांच से गुजरना पड़ता है। इसमें एंडोरेंस रन, लॉन्ग जंप, ऑब्सटेकल कोर्स और स्ट्रेंथ टेस्ट शामिल है। मानसिक मजबूती के जांच भी उतनी ज्यादा जरूरी है। इसमें उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाता है कि वह दबाव, डर, तनाव और मुश्किल हालातों में फैसला कैसे लेते हैं। इस ट्रेनिंग के सबसे मुश्किल पहलुओं में से एक है कंट्रोल्ड नींद की कमी। ट्रेनी को लंबे समय तक सिर्फ तीन से चार घंटे की ही नींद मिल सकती है।

यह ट्रेनिंग काफी ज्यादा मुश्किल होती है। इसमें लगभग 9 महीने लगातार बेसिक और एडवांस्ड ड्रिल शामिल होती है। ट्रेनी 20-25 किलो का वजन उठाकर लंबी दूरी की दौड़, रॉक क्लाइंबिंग और यहां तक की पैराशूट से जुड़ी एक्सरसाइज भी करते हैं। आपको बता दें कि इस प्रक्रिया के दौरान सिलेक्शन और ट्रेनिंग के समय में लगभग 70% से 80% उम्मीदवार बाहर हो जाते हैं। केवल एक छोटा सा हिस्सा ही सफलतापूर्वक इस ट्रेनिंग को पूरा कर पाता है।
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