डेस्क। इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई और कई लोगों की हालत गंभीर है। कॉलोनी में काफी समय से गंदा पानी आ रहा था और लोग अंजाने में उसी पानी का सेवन करने से बीमारी की चपेट में आ गए। ऐसे में सवाल यह है कि साफ पानी की पहचान कैसे की जाती है?
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पानी की स्वच्छता की जांच करने के लिए टेस्टिंग किट की मदद ली जा सकती है। कोलीफॉर्म, ई-कोलाई टेस्ट किट – इस टेस्टिंग किट के नतीजे 90 प्रतिशत तक सही होते हैं। यह टेस्टिंग किट water में सीवर से आने वाले बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाती है। पानी की टेस्टिंग करने के 18-24 घंटे बाद इसके नतीजे सामने आ जाते हैं।
क्लोरीन टेस्टिंग किट:
पानी में किटाणुओं को मारने के लिए क्लोरीन का इस्तेमाल किया जाता है। नगर निगम की सप्लाई वाले पानी में क्लोरीन आम बात है। क्लोरीन किट पानी में क्लोरीन की मात्रा बताती है। ऐसे में अगर पानी में क्लोरीन है, तो पानी पीने के लिए सुरक्षित है।
टर्बिडिटी टेस्ट ट्यूब:
कई बार बरसात या पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी गंदा आने लगता है। ऐसे में पानी की शुद्धता की जांच करने के लिए टर्बिडिटी टेस्ट ट्यूब का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन किट्स के आंकड़े काफी हद तक सटीक होते हैं। मगर पानी की शुद्धता के लिए इनपर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता है। कई बार ये किट्स पानी में मौजूद बैक्टीरिया को नहीं पकड़ पाती हैं। ऐसे में पानी को लैब टेस्टिंग के लिए भेजना बेहतर है। पानी को उबाल कर पीने का तरीका भी इस्तेमाल होता आया है। ध्यान रहे कि पानी उबालने से उसके बैक्टीरिया खत्म होते हैं।
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