डेस्क। Chaitra Navratri का पावन पर्व शक्ति की उपासना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च 2026 से हो रही है। बहुत से लोग पूरे नौ दिनों तक उपवास रखते हैं, तो वहीं कई श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो केवल पहला और अष्टमी का व्रत रखकर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।
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शास्त्रों में इन दोनों व्रतों का विशेष महत्व बताया गया है, क्योंकि पहला दिन संकल्प का होता है और अष्टमी पूर्णता का प्रतीक है। यदि आप भी इस वर्ष केवल ये दो व्रत रखने की सोच रहे हैं, तो इनसे जुड़े सही नियमों को जानना आपके लिए बहुत जरूरी है। नियमों का सही पालन न केवल पूजा को सफल बनाता है, बल्कि आपके मन में एक नई सहजता और शांति का अहसास भी भर देता है।

नवरात्र के पहले दिन व्रत रखने का अर्थ है मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का संकल्प लेना। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और फिर कलश स्थापना के साथ अपने व्रत की शुरुआत करें।पहला व्रत रखने वालों को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि वे पूरे दिन अपने विचारों को शुद्ध रखें।
अष्टमी का व्रत नवरात्र के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है, जिसे ‘महाष्टमी’ भी कहा जाता है। जो लोग पहला व्रत रखते हैं, उनके लिए अष्टमी का व्रत उस संकल्प को पूरा करने जैसा होता है।इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। अष्टमी व्रत के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व है, जिसमें छोटी बच्चियों को मां का रूप मानकर उन्हें भोजन कराया जाता है। ऐसा माना जाता है कि बिना कन्या पूजन के नवरात्र का फल पूरा नहीं मिलता।
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