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Friday, April 10, 2026

अगर NOTA में पड़े सबसे ज्यादा वोट तो कौन बनता है विधायक, समझें क्या है नियम

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। चुनाव में वोटिंग करते समय ईवीएम पर एक और ऑप्शन देखने को मिलता है जिसे NOTA कहते हैं। NOTA का मतलब होता है इनमें से कोई नहीं। यानी यह लोगों को सभी उम्मीदवारों को खारिज करने की शक्ति देता है लेकिन क्या होता अगर नोटा को सच में सबसे ज्यादा वोट मिल जाए?

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भारत के चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक नोटा के लिए डाले गए वोटों को विजेता तय करने के लिए वैध वोटों के तौर पर नहीं गिना जाता। इस वजह से अगर नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं तो वास्तविक उम्मीदवारों में से जिस उम्मीदवार को दूसरे सबसे ज्यादा वोट मिले होते हैं, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो दूसरे नंबर पर रहने वाला उम्मीदवार एमएलए बन जाता है।

लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चुनाव रद्द नहीं होते हैं, भले ही नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिले हों। फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर नोटा के नतीजे के आधार पर किसी चुनाव को अमान्य घोषित करने का कोई भी कानूनी प्रावधान नहीं है लेकिन एक दिलचस्प अपवाद भी है। महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे कुछ राज्यों में स्थानीय निकाय चुनावों के नियम यह अनुमति देते हैं कि अगर नोटा को बहुमत मिल जाए तो दोबारा चुनाव कराए जाएं।

नोटा को ऐतिहासिक PUCL बनाम भारत संघ 2013 के फैसले के बाद पेश किया गया था। इसका मकसद वोटरों को अपनी असहमति जाहिर करने का एक जरिया देना है। हालांकि यह सीधे तौर पर चुनावी नतीजों को नहीं बदलता लेकिन नोटा का ज्यादा प्रतिशत राजनीतिक दलों को जनता की असंतुष्टि के बारे में एक मजबूत संदेश देता है।

Tag: #nextindiatimes #NOTA #WestBengalElections

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