नई दिल्ली। भारत में Census 2027 का आगाज हो चुका है। जब जनगणना की जानकारी के लिए लोग आपके दरवाजे पर दस्तक देंगे, तो वे आपके परिवार और घर से जुड़े 33 महत्वपूर्ण सवाल पूछेंगे। ऐसे में हर नागरिक के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उनकी निजी जानकारी कितनी सुरक्षित है?
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जनगणना के दौरान आपसे ली गई हर जानकारी कानूनी रूप से पूरी तरह गोपनीय होती है। जनगणना आयुक्त के अनुसार जनगणना अधिनियम की धारा 15 नागरिक के डेटा को एक अभेद्य सुरक्षा प्रदान करती है। इस कानून के तहत व्यक्तिगत जानकारी को किसी भी स्थिति में सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। यह सुरक्षा इतनी कड़ी है कि सरकार का कोई भी दूसरा विभाग या निजी संस्था आपके व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच नहीं बना सकती है।

अक्सर लोगों को डर रहता है कि कहीं उनकी जानकारी सूचना का अधिकार (RTI) के तहत कोई और न निकाल ले लेकिन नियमों के मुताबिक जनगणना का व्यक्तिगत डेटा RTI के दायरे से पूरी तरह बाहर है। इतना ही नहीं, आपके द्वारा दी गई जानकारी को किसी भी अदालत में सबूत या साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। चाहे किसी सरकारी योजना का लाभ लेना हो या कोई कानूनी विवाद, जनगणना के डेटा का उपयोग किसी भी व्यक्तिगत दावे की पुष्टि के लिए नहीं किया जाएगा।
इस बार की जनगणना पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल होगी। डेटा एकत्र करने के लिए मोबाइल ऐप का सहारा लिया जा रहा है, जिससे कागजी कार्रवाई की गलतियां कम होंगी। वहीं, पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल बनाया गया है। डेटा सेंटरों को क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर घोषित किया गया है।इन केंद्रों की सुरक्षा राष्ट्र की रणनीतिक संपत्तियों की तरह की जाएगी।
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