नई दिल्ली। भारतीय संसद (Parliament) चलाना एक काफी महंगा काम है। संसदीय कार्यवाही पर प्रति मिनट लगभग ढाई लाख रुपए का खर्च आता है। इसका मतलब है कि संसद के 1 घंटे का खर्च लगभग डेढ़ करोड़ रुपए है। यह आंकड़ा मुख्य रूप से लोकसभा के लिए है। राज्यसभा में कम समय की बैठक होती हैं और कम सदस्य होते हैं। इसमें हर घंटे लगभग 75 लाख रुपए का खर्च आता है।
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इसका एक बड़ा हिस्सा सांसदों के वेतन और दैनिक भत्ते में भी जाता है। इसी के साथ देश भर से आने वाले सांसदों की यात्रा और रहने के पर भी खर्च किया जाता है। इन सबके अलावा संसद को चालू रखने में हजारों कर्मचारी शामिल होते हैं। जैसे सचिवालय कर्मचारी, अनुवादक, रिपोर्टर, मार्शल और तकनीकी दल।

अकेले सुरक्षा में ही कई एजेंसियां शामिल है जैसे संसद सुरक्षा सेवा, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बल। बिजली, एयर कंडीशनिंग, पानी की आपूर्ति, सफाई, संसद परिसर के रखरखाव और स्टेशनरी जैसे बुनियादी ढांचे के खर्च भी बिल का एक बड़ा हिस्सा हैं। इतना ही नहीं बल्कि सीधे प्रसारण की भी तकनीकी और प्रसारण लागत जुड़ी हुई है। जब संसद पूरे दिन काम करती है तो अनुमानित खर्च लगभग 9 करोड़ रुपए प्रतिदिन आता है। इस आंकड़े को लगभग 6 घंटे की औसत बैठक मान कर लिया गया है।
संसद का शीतकालीन सत्र 2025 1 से 19 दिसंबर तक 15 बैठकों के लिए तय है। 9 करोड रुपए के अनुमानित सैनिक खर्च के आधार पर इस सत्र की कुल लागत लगभग 135 करोड़ होने की उम्मीद है। 11वें दिन तक ज्यादातर दिनों में सामान्य बैठकों को मानते हुए संसद पहले ही लगभग 99 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है।
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