स्पोर्ट्स डेस्क। मैच से पहले मैदान पर सिक्का उछलता है और उसी एक पल में पूरे मुकाबले की दिशा तय हो जाती है। कभी बल्लेबाजी आसान हो जाती है तो कभी गेंदबाजों की चांदी लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि toss उछालने का हक सिर्फ कप्तान को ही क्यों दिया जाता है?
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क्रिकेट में टॉस सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि रणनीति का पहला हथियार माना जाता है। पिच की नमी, मौसम की स्थिति, ओस और रोशनी जैसी चीजें सीधे मैच के नतीजे को प्रभावित करती हैं। इसलिए टॉस जीतकर लिया गया फैसला कई बार मैच का रुख बदल देता है। यही वजह है कि टॉस को खेल के सबसे निर्णायक क्षणों में गिना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी ICC के नियमों के अनुसार टॉस की प्रक्रिया टीम के आधिकारिक प्रतिनिधि द्वारा की जाती है, जो आमतौर पर टीम का कप्तान होता है। दोनों टीमों के कप्तान मैच रेफरी और अंपायरों की मौजूदगी में टॉस के लिए मैदान पर आते हैं। नियम यह मानता है कि कप्तान टीम का जिम्मेदार और निर्णय लेने वाला व्यक्ति होता है, इसलिए उसी को यह अधिकार दिया जाता है। परंपरागत रूप से अधिकतर मुकाबलों में घरेलू टीम का कप्तान सिक्का उछालता है, जबकि मेहमान टीम का कप्तान हेड्स या टेल्स कॉल करता है। हालांकि यह कोई कठोर नियम नहीं है। मैच रेफरी चाहें तो इस प्रक्रिया को बदल भी सकते हैं।
क्रिकेट के नियमों के अनुसार, टॉस आमतौर पर मैच शुरू होने से करीब 15 से 30 मिनट पहले कराया जाता है। इस दौरान दोनों कप्तान अपनी रणनीति लगभग तय कर चुके होते हैं। टॉस के तुरंत बाद टॉस जीतने वाला कप्तान यह घोषणा करता है कि उसकी टीम पहले बल्लेबाजी करेगी या गेंदबाजी।
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