डेस्क। ईरान के सुप्रीम लीडर (Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की यूएस-इजरायली हमले में मौत हो गई है। ईरान की सरकारी मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की है। इसके बाद ईरान ने उनके सबसे बड़े बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया है। इसी बीच आइए जानते हैं कि ईरान में सुप्रीम लीडर कैसे चुना जाता है?
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ईरान का शासन सिस्टम एक धार्मिक पॉलिटिकल सिद्धांत पर आधारित है। इसे विलायत-ए-फकीह के नाम से जाना जाता है। इसके तहत सुप्रीम लीडर देश में राष्ट्रपति और संसद से ऊपर सबसे बड़ी अथॉरिटी रखता है। यह पद मिलिट्री, ज्यूडिशरी, इंटेलिजेंस एजेंसी और मुख्य नेशनल पॉलिसी को कंट्रोल करता है। यह सिस्टम 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद बनाया गया था, जब ईरान एक इस्लामी रिपब्लिक में बदल गया था।

प्रेसिडेंट्स को पब्लिक वोट से चुना जाता है लेकिन सुप्रीम लीडर को एक कॉन्स्टिट्यूशनल धार्मिक प्रक्रिया से चुना जाता है। यह पद आमतौर पर जिंदगी भर के लिए होता है जब तक की लीडर इस्तीफा न दे दे, काम करने में असमर्थ ना हो जाए या फिर उसकी मौत ना हो जाए। जब तक एक्सपर्ट्स की असेंबली औपचारिक रूप से नए सुप्रीम लीडर को नहीं चुन लेती तब तक ईरान के संविधान के मुताबिक देश के मामलों को एक टेम्पररी लीडरशिप काउंसिल मैनेज करती है।
ईरान के संविधान के मुताबिक सुप्रीम लीडर एक सीनियर शिया मौलवी होना चाहिए। इसे मुजतहिद भी कहा जाता है। इस व्यक्ति को इस्लामिक कानून की गहरी जानकारी, मजबूत लीडरशिप स्किल्स और देश को राजनीतिक और धार्मिक रूप से गाइड करने की क्षमता होनी चाहिए। इस धार्मिक क्वालिफिकेशन के अलावा कैंडिडेट को राजनीतिक समझदारी, एडमिनिस्ट्रेटिव क्षमता और पब्लिक क्रेडिबिलिटी दिखानी चाहिए।
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