डेस्क। मिडिल ईस्ट में बढ़ते टेंशन और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास के संकट के बीच भारत सरकार फारस की खाड़ी में फंसे जहाजों की सुरक्षा के लिए इंडियन नेवी को तैनात करने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले पर जल्द ही फैसला लिया जा सकता है। चलिए हम आपको बताते हैं भारत की समुद्री सीमा कितनी दूर तक फैली है?
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भारत की समुद्री सीमाएं (Maritime Border) यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी 1982 के मुताबिक तय की गई हैं। ये इंटरनेशनल नियम भारत में टेरिटोरियल वाटर्स, कॉन्टिनेंटल शेल्फ, एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन और दूसरे मैरिटाइम जोन एक्ट 1976 के जरिए लागू किए जाते हैं।
पहली और सबसे जरूरी समुद्री सीमा टेरिटोरियल वॉटर है। यह भारत की बेसलाइन से तट के साथ 12 नॉटिकल मील तक फैली हुई है। इस इलाके में भारत का समुद्र की सतह, समुद्र तल और यहां तक की इसके ऊपर के एयर स्पेस पर भी पूरा कंट्रोल होता है। टेरिटोरियल वॉटर के आगे एक जुड़ा हुआ जोन है। यह तट से 24 नॉटिकल मील तक फैला हुआ है।

भारत के कंट्रोल में सबसे बड़ा समुद्री जोन एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन है। यह समुद्र तट से 200 नॉटिकल मील तक फैला है। इस जोन में भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों पर एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक अधिकार हैं। इसमें मछली पकड़ने का अधिकार, समुद्र तल से तेल और मिनरल निकालना, आर्टिफिशियल आइलैंड बनाना और साइंटिफिक रिसर्च करना शामिल है।भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल रेंज भारत के समुद्री जोन तक ही सीमित नहीं है। नौसेना एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन से आगे भी अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में जहाज और सबमरीन को तैनात कर सकती है। इसे आमतौर पर हाई सीज के नाम से जाना जाता है।
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