लाइफस्टाइल डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में Hair Fall एक आम समस्या बन गई है। जब भी हम कंघी में फंसे बालों के गुच्छे देखते हैं, तो अक्सर सबसे पहला दोष स्ट्रेस को दिया जाता है। इसमें कोई शक नहीं कि मानसिक तनाव बालों की सेहत का दुश्मन है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बहुत ज्यादा हेयर फॉल होने के पीछे सिर्फ तनाव ही एकमात्र विलेन नहीं है?
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हमारे बाल केराटिन प्रोटीन से बने होते हैं। अगर आपकी डाइट में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, आयरन, विटामिन-बी12, और विटामिन-डी की कमी है, तो बाल अपनी मजबूती खो देते हैं। खासकर भारतीय महिलाओं में आयरन की कमी हेयर फॉल का सबसे बड़ा कारण पाई जाती है। जब शरीर में आयरन कम होता है, तो ऑक्सीजन बालों की जड़ों तक नहीं पहुंच पाती, जिससे वे कमजोर होकर गिरने लगते हैं।

हम अक्सर विज्ञापनों को देखकर बालों पर तरह-तरह के इस्तेमाल करते हैं। सल्फेट और पैराबेंस वाले शैम्पू, बार-बार बालों को कलर करना, रिबॉन्डिंग या स्मूथनिंग जैसे केमिकल ट्रीटमेंट्स बालों की जड़ों को कमजोर कर देते हैं।इसके अलावा, ज्यादा हीट स्टाइलिंग बालों के नेचुरल मॉइश्चर को खत्म कर उन्हें बीच से तोड़ने का काम करती है।
अगर परिवार में माता-पिता या किसी करीबी को कम उम्र में बाल झड़ने की समस्या रही है, तो यह जेनेटिक हो सकता है। इसे एंड्रोजेनिक एलोपेसिया कहते हैं। इसमें बाल धीरे-धीरे पतले होने लगते हैं और समय के साथ स्कैल्प दिखने लगती है। अगर आपको लंबे समय से जिद्दी डैंड्रफ, फंगल इन्फेक्शन या सोरायसिस की समस्या है, तो स्कैल्प में सूजन आ जाती है। यह सूजन बालों के फॉलिकल्स को नुकसान पहुंचाती है, जिससे बाल जड़ों से ढीले हो जाते हैं।
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