नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट की आशंका के चलते कीमतें लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इस उछाल का भारत में ईंधन की अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ा है। इसी बीच केंद्र सरकार ने Petrol और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती कर दी है लेकिन क्या इससे उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतें कम होंगी?
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सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी है। इसी के साथ डीजल के लिए ₹10 प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह से हटा दी गई है। कागज पर इससे ईंधन की कीमतों में बड़ी गिरावट की गुंजाइश बनती है। एक्साइज ड्यूटी एक सेंट्रल टैक्स है जो वस्तुओं के उत्पादन पर लगाया जाता है।पेट्रोल और डीजल जीएसटी के दायरे में नहीं आते। इसका मतलब है कि उन पर सेंट्रल एक्साइज और राज्य स्तरीय VAT के जरिए अलग से टैक्स लगाया जाता है।

टैक्स कटौती के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत नहीं गिर सकतीं।दरअसल ऐसा कहा जा रहा है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनीज इस समय कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से भारी नुकसान का सामना कर रही हैं। अनुमानों के मुताबिक उन्हें लगभग ₹48.8 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसकी भरपाई कंपनियां इस टैक्स राहत का इस्तेमाल करके करने की कोशिश कर रही हैं।
अगर तेल कंपनियां एक्सेस कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का फैसला करती हैं तो पेट्रोल की कीमतें ₹10 से ₹12 प्रति लीटर तक कम हो सकती हैं। इसी के साथ डीजल ₹8 से ₹10 प्रति लीटर तक सस्ता हो सकता है। हालांकि यह पूरी तरह से बाजार की स्थिति और कंपनियों के फैसले पर निर्भर करता है।
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