एंटरटेनमेंट डेस्क। मशहूर सिंगर Arijit Singh ने हाल ही में प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने का ऐलान किया है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि वह अब फिल्मों के लिए गाने नहीं गाएंगे। अरिजीत के इस फैसले के बाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है कि आखिर प्लेबैक सिंगिंग क्या होती है?
यह भी पढ़ें-कभी पानी की बोतल बेचता था ये एक्टर, अब इस फिल्म से दुनिया में बजाया डंका
दरअसल प्लेबैक सिंगिंग फिल्मों में गाने गाने की वह परंपरा है, जिसमें गायक पहले स्टूडियो में गाना रिकॉर्ड करता है और बाद में उस गाने पर अभिनेता या अभिनेत्री परदे पर अभिनय करते हैं। यानी स्क्रीन पर दिखने वाला कलाकार असल में गा नहीं रहा होता बल्कि उसके होंठ पहले से रिकॉर्ड की गई आवाज के साथ तालमेल बैठाते हैं, इसी प्रक्रिया को प्लेबैक सिंगिंग कहा जाता है।

भारतीय सिनेमा में प्लेबैक सिंगिंग की परंपरा दशकों पुरानी है। इसकी शुरुआत उस दौर में हुई जब फिल्मों में तकनीकी सीमाएं थीं और हर अभिनेता अच्छा गायक नहीं होता था। ऐसे में प्रशिक्षित गायकों की आवाज का इस्तेमाल किया जाने लगा। समय के साथ यह परंपरा इतनी मजबूत हो गई कि प्लेबैक सिंगर्स खुद स्टार बन गए। लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, आशा भोसले जैसे दिग्गजों ने अपनी आवाज से कई पीढ़ियों के सितारों को पहचान दिलाई।
आधुनिक दौर में अरिजीत सिंह प्लेबैक सिंगिंग का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते हैं। “तुम ही हो”, “चन्ना मेरेया”, “अगर तुम साथ हो”, “शायद” जैसे गानों ने न सिर्फ फिल्मों को हिट बनाया बल्कि अरिजीत की आवाज को हर दिल तक पहुंचा दिया। यही वजह है कि उनके प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेने की खबर इतनी बड़ी मानी जा रही है। उनके इस फैसले से फैंस काफी नाखुश हैं।
Tag: #nextindiatimes #ArijitSingh #playbacksinging #Entertainment




