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Saturday, March 28, 2026

जानें जेवर एयरपोर्ट की वो खूबियां, जो इसे बाकी एयरपोर्ट्स से अलग बनाती हैं

नोएडा। 25 साल पहले देखा गया जेवर एयरपोर्ट (Jewar Airport) का सपना अब पूरा होने को है। साल 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की ओर से जेवर में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल और एविएशन हब (टीआईएएच) का प्रस्ताव पेश किया था। इसके दो साल बाद अटल बिहारी वाजपेयी की तत्कालीन सरकार ने एयरपोर्ट के लिए बनाई गई तकनीकी व्यवहार्यता की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था।

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पूरी तरह विकसित हो जाने के बाद जेवर एयरपोर्ट इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से करीब ढाई गुना ज्यादा बड़ा होगा। 3900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे प्रथम चरण में बनकर तैयार है। इस हवाई अड्डे पर कुल छह रनवे बनाने की योजना है।

जेवर एयरपोर्ट रनवे को रनवे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम जैसी अल्ट्रा मॉडर्न क्षमताओं से लैस किया गया है। घने कोहरे, भारी बारिश और खराब मौसम के दौरान 50 मीटर तक की बहुत कम रनवे दृष्यता की स्थिति में भी विमानों का आवागमन जारी रह सकता है।

एयरपोर्ट में सालाना 2.5 मीट्रिक टन क्षमता वाला एक मल्टी-माडल कार्गो हब है।जेवर एयरपोर्ट को एविएशन हब के तौर पर तैयार किया जा रहा है, जिसमें मेंटेंनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग और एयर कार्गो की सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी।

एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायरफाइटिंग कैटेगरी 9 की हाई सिक्योरिटी कैटेगरी में शामिल किया गया है।जिसमें हवाई अड्डों पर विमान दुर्घटनाओं, आपातकालीन लैंडिंग और आग से संबंधित घटनाओं में बचाव व अग्निशमन कार्य शामिल होते हैं। इसकी वजह से यहां बोइंग 777 जैसे बड़े विमानों का संचालन संभव होगा।

एयरपोर्ट पर 24 कोड-सी (मध्यम आकार के विमान जिनके पंखों की चौड़ाई 24 मीटर से अधिक लेकिन 36 मीटर से कम) और 2 कोड-डी और एफ विमान के लिए पार्किंग स्टैंड बनाए गए हैं।

Tag: #nextindiatimes #JewarAirport #Noida

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