नई दिल्ली। 11 दिसंबर को बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद के खिलाफ बिना नाम लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखित शिकायत दर्ज की। इस शिकायत में आरोप लगाया है कि सांसद को Parliament के अंदर ई-सिगरेट पीते हुए देखा गया है। अब यह मामला एक गंभीर कानूनी और संसदीय मोड़ ले चुका है।
यह भी पढ़ें-यदि संसद में मारपीट कर लें सांसद तो कितनी मिलेगी सजा? जानें यहां
बता दें कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निश्चित अधिनियम, 2019 के तहत ई-सिगरेट पूरी तरह से बैन है। ई-सिगरेट को वेप्स या इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम के नाम से भी जाना जाता है। ये डिवाइस निकोटिन और फ्लेवरिंग एजेंट वाले लिक्विड केमिकल्स को गर्म करके भाप बनाते हैं। इस भाप को यूजर्स सांस से अंदर लेते हैं।

इस कानून के तहत ई सिगरेट का इस्तेमाल करना एक दंडनीय अपराध है। अगर कोई पहली बार इस कानून का उल्लंघन करता है तो उसे ₹1 लाख तक का जुर्माना या फिर 1 साल की जेल या दोनों ही हो सकते हैं। अगर यह अपराध दोहराया जाता है तो सजा काफी ज्यादा सख्त हो जाती है। जिसमें ₹5 लाख तक का जुर्माना और 3 साल तक की जेल हो सकती है।
भारतीय कानून के तहत एक सांसद को तभी अयोग्य ठहराया जाता है जब उसे किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाए और 2 साल या फिर उससे ज्यादा की सजा सुनाई जाए। इस मामले में पहली बार अपराध करने पर ज्यादा से ज्यादा एक साल की सजा है जो अयोग्यता की सीमा को पूरा नहीं करती। अगर आरोप साबित होते हैं तो इस मामले में स्पीकर कड़ी चेतावनी या फटकार लगा सकते हैं, जुर्माना लगा सकते हैं या फिर कुछ समय के लिए सांसद को संसद से सस्पेंड कर सकते हैं।
Tag: #nextindiatimes #Parliament #Ecigarettes




