सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के जनपद सिद्धार्थनगर का शिया बहुल कस्बा हल्लौर आज आंसुओं के सैलाब में डूबा हुआ है। ईरान के Ayatollah Ali Khamenei की शहादत की खबर जैसे ही डुमरियागंज के इस ऐतिहासिक गांव में पहुंची, वहां कोहराम मच गया। क्या बुजुर्ग, क्या जवान और क्या बच्चे—हर दिल गमगीन नजर आया।
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रविवार की सुबह हल्लौर के लिए किसी कयामत से कम नहीं थी। शहादत की तस्दीक होते ही गांव में पसरा सन्नाटा कुछ ही देर में दहाड़ों और सिसकियों में बदल गया। गांव के मध्य स्थित दरगाह चौक पर देखते ही देखते हजारों का मजमा इकट्ठा हो गया। हल्लौर की जामा मस्जिद के पेश इमाम, मौलाना शाहकार हुसैन जैदी ने भरे गले से जब सामूहिक घोषणा की, तो पूरा इलाका ‘इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन’ की सदाओं से गूंज उठा।

मौलाना शाहकार ने अपने संबोधन में शहीद रहबर के जीवन और उनके सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयतुललाह खामनेई केवल एक नेता नहीं, बल्कि इमाम हुसैन (अ.स.) के सच्चे सिपाही थे, जिन्होंने ताउम्र ज़ुल्म के खिलाफ सिर नहीं झुकाया। इस दुखद मौके पर पूरे गांव में तीन दिवसीय शोक की स्थिति है। घरों और इमामबाड़ों पर काले झंडे लगा दिए गए हैं और ग्रामीणों ने स्वेच्छा से अपने कारोबार बंद रखे हैं।
हल्लौर के लोगों का मानना है कि इस शहादत ने बातिल की हार और हक की जीत पर अंतिम मुहर लगा दी है। सरहदें भले ही दूर हों, लेकिन रूहानी रिश्तों की तड़प आज हल्लौर की हर गली में महसूस की जा रही है। वर्तमान में पूरे क्षेत्र में गम और गुस्से की लहर है, जिसे देखते हुए प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह मुस्तैद है।
(रिपोर्ट- दीप यादव, सिद्धार्थनगर)
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