डेस्क। हाल ही में ईरान के साथ तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही जीत का दावा किया हो, लेकिन इतिहास के पन्ने कुछ और ही गवाही देते हैं। 1776 में आजादी मिलने के बाद से अब तक सौ से ज्यादा युद्ध लड़ने वाला यह सुपरपावर कई बार रणभूमि में धूल चाट चुका है।
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1776 में ब्रिटेन से मुक्त होने के महज नौ साल बाद, 1785 में अमेरिका का सामना अल्जीरिया से हुआ। उस समय America की नौसेना उतनी मजबूत नहीं थी और ब्रिटेन की शाही फौज अब अमेरिकी व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा नहीं कर रही थी। इस कमजोरी का फायदा उठाकर बार्बरी समुद्री डाकुओं ने अल्जीयर्स के पास 53 अमेरिकी जहाजों को कब्जे में ले लिया और 180 नाविकों को बंदी बना लिया।
साल 1812 में अमेरिका ने ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध का बिगुल फूंका था। इस जंग की मुख्य वजह व्यापारिक पाबंदियां और अमेरिकी नाविकों की ब्रिटिश रॉयल नेवी में जबरन भर्ती थी। अमेरिका ने ब्रिटिश कब्जे वाले कनाडा पर हमला तो कर दिया, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ गया। ब्रिटिश सेना ने अमेरिका की व्हाइट हाउस समेत कई सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया।

अमेरिकी विस्तारवाद की नीति को 1866 में करारा झटका लगा जब रेड क्लाउड युद्ध छिड़ा। यह संघर्ष उत्तर-मध्य व्योमिंग में लकोटा, उत्तरी चेयेन और उत्तरी आरापोहो जनजातियों की जमीन हड़पने की कोशिश का नतीजा था।इन जनजातीय योद्धाओं ने अमेरिकी किलों पर इतने भीषण हमले किए कि सेना के पैर उखड़ गए। अमेरिका के सैन्य इतिहास का सबसे काला अध्याय 1955 से 1975 के बीच चला वियतनाम युद्ध है। 20 सालों तक चली इस जंग में अमेरिका के 58,000 सैनिक मारे गए या लापता हो गए थे।
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