एंटरटेनमेंट डेस्क। हिंदी सिनेमा में जब भी हॉरर फिल्मों की बात की जाती है, तो कई फिल्में हमारे जेहन में आती हैं। 70, 80 और 90 के दशक में हॉरर फिल्मों को बनाने का अंदाज बेहद अलग था। खौफ की दास्तां उस फिल्म ने ऐसी लिखी कि सिनेमाघरों के बाहर एंबुलेंस तक खड़ी कर दी गई थी।
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आज हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं वो फिल्म 80 के दशक में आई थी और उस दौर की वो सबसे बड़ी हॉरर फिल्म थी। फिल्म का नाम था ‘दरवाजा’ (Darwaza), जो कि साल 1978 में आई थी और इस फिल्म को बनाने का श्रेय किसी और को नहीं बल्कि रामसे ब्रदर्स को जाता है। वही रामसे ब्रदर्स जिन्होंने हिंदी सिनेमा को हॉरर सिनेमा (Horror Films) की एक अलग दुनिया दी।

रामसे ब्रदर्स 80 के दशक में कई हिट और बड़ी हॉरर फिल्में बना चुके थे लेकिन जो खौफ फिल्म ‘दरवाजा’ ने फैलाया, वो शायद बाकी फिल्में उस दौर में नहीं कर पाईं। यही वजह है कि इस फिल्म को देखने के लिए इनाम तक रखा गया था। ये तो कुछ भी नहीं है, जब ये फिल्म सिनेमाघरों में लगी थी, तब थिएटर्स के बाहर एंबुलेंस खड़ी रहती थी।
उस दौर में इस फिल्म का इतना खौफ इतना ज्यादा था कि, मेकर्स ने इस फिल्म को अकेले देखने वालों के लिए सीधा 10000 का इनाम रख दिया था। शर्त यह थी कि फिल्म शुरू होने से लेकर खत्म होने तक व्यक्ति को सीट पर डटे रहना होगा और बीच में लाइट नहीं जलाई जाएगी। दावा किया जाता है कि कुछ लोग फिल्म देखने गए भी लेकिन देख नहीं पाए और भाग खड़े हुए।
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