डेस्क। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की है। इसी बीच भारतीय राजनीति में एक लंबे समय से चली आ रही चर्चा फिर से शुरू हो चुकी है तो आइए जानते हैं कि Kanshi Ram और बी आर आंबेडकर भारतीय राजनीति में क्यों जरूरी हैं और दोनों में से दलितों का बड़ा नेता कौन है?
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डॉ बी आर आंबेडकर ने भारत में दलित सशक्तिकरण की नींव रखी थी। भारत के संविधान के मुख्य निर्माता के तौर पर उन्होंने इस बात को पक्का किया की हाशिए पर पड़े समुदाय को मौलिक अधिकार, आरक्षण नीति और भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा जैसे प्रावधानों के जरिए कानूनी सुरक्षा मिले। आंबेडकर ने एक बड़ा सामाजिक सुधार आंदोलन भी चलाया।उनका नारा ‘शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित हो’ पूरे देश में दलित आंदोलनों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत बन गया।

जहां आंबेडकर ने वैचारिक खाका तैयार किया वहीं कांशीराम ने इन विचारों को राजनीतिक सत्ता में बदलने पर ध्यान लगाया। उनका मानना था कि राजनीतिक सत्ता ही वह ‘मास्टर की’ (मास्टर चाबी) है जो हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए सामाजिक और आर्थिक न्याय के दरवाजे खोल सकती है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कांशीराम ने BAMCEF, दलित शोषित समाज संघर्ष समिति और आखिरकार बहुजन समाज पार्टी जैसे शक्तिशाली जमीनी संगठन बनाए।
दोनों नेताओं ने भारतीय लोकतंत्र को और ज्यादा मजबूत करने में काफी बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर नागरिक के वोट का बराबर महत्व होता है, भले ही उसकी जाति या फिर सामाजिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो। आंबेडकर और कांशीराम का प्रभाव उनके अपने आंदोलनों से काफी ज्यादा दूर तक फैला हुआ है।
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