एंटरटेनमेंट डेस्क। भारत में कई ऐसे किस्से हैं जो दिलचस्प तो हैं ही साथ ही हमें गर्व भी महसूस कराते हैं। एक ऐसा ही किस्सा है भारत की पहली सेलेब्रिटी सिंगर Gauhar Jaan का। एक ऐसी शख्सियत जिन्होंने अपना नाम बदला, तवायफ का पेशा अपनाया, बेहतरीन सिंगर बनीं और दुनिया भर में ‘ग्रामोफोन गर्ल’ के नाम से जानी गई।
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भारत में अंग्रेजों के शासन के वक्त गौहर जान उन शख्सियतों में से थी जो अंग्रेजों के सामने नहीं झूकती थीं। उस वक्त भारत में सोने की कीमत 20 रुपये तोला था तब गौहर जान एक गाने को रिकॉर्ड करने के 3 हजार रुपये लिया करती थी। इतना ही नहीं वह एक लग्जरी लाइफ भी जीती थीं, उनके पास अपनी खुद की बग्गीयां थीं जिनमें बैठकर वे आना-जाना करती थीं। अंग्रेजों ने उन पर अपनी फीस कम करने का दबाव भी बनाया लेकिन गौहर जान उनके सामने नहीं झूकी।

वो सिर्फ महाराजाओं की महफिलों में गाया करती थी, आम जनता के लिए उनका गाना सुनना एक सपने की तरह था। इसीलिए उनकी आवाज को ग्रामोफोन में रिकॉर्ड करने का फैसला किया ताकि आम लोग भी उनकी आवाज सुन सके। इस तरह गौहर जान पहली सिंगर बनी जिनकी ग्रामोफोन में आवाज रिकॉर्ड की गई।
1902 में पहली बार गौहर जान की आवाज ग्रामोफोन में रिकॉर्ड की गई। अपने करियर में उन्होंने 1902 से 1920 तक 10 से अधिक भाषाओं में 600 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए जिनमें बंगाली, हिंदुस्तानी, गुजराती, तमिल, मराठी, अरबी, फारसी, पश्तो, फ्रेंच और अंग्रेजी शामिल हैं। अपने अंतिम दिनों में, वह मैसूर के कृष्ण राजा वाडियार चतुर्थ के निमंत्रण पर मैसूर चली गईं और 17 जनवरी 1930 को मैसूर में उनकी मृत्यु हो गई।
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