नई दिल्ली। बांग्लादेश के विदेश मंत्री पिछले दिनों खलीलुर रहमान भारत आए और उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल जैसे बड़े नेताओं से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) के प्रत्यपर्ण की अपनी मांग को फिर से दोहराया। हालांकि भारत ने अब तक इस अनुरोध पर कोई भी जवाब नहीं दिया है।
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बता दें कि भारत ने शेख हसीना को देश में अनिश्चित काल तक रहने की इजाजत दी है। आधिकारिक बयानों के मुताबिक उनके रहने की अवधि कानून द्वारा तय नहीं है और यह काफी हद तक उनके अपने फैसले और भारत के राजनीतिक रुख पर निर्भर करती है।उनका राजनयिक पासपोर्ट रद्द होने के बाद भी भारत ने 2025 में तकनीकी आधार पर वीजा देकर उनके रहने की अवधि बढ़ा दी है। यह रेजिडेंस परमिट की तरह काम करता है।

भारत में शरण देने के संबंध में कोई एक लिखित कानून मौजूद नहीं है। इसके बजाय ऐसे फैसले राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर लिए जाते हैं। ये फैसले और राजनयिक संबंध और राष्ट्रीय हितों पर निर्भर होते हैं। बांग्लादेश उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है लेकिन भारत कुछ शर्तों के तहत कानूनी रूप से इस मांग को ठुकरा सकता है।
अगर मामले को राजनीतिक प्रकृति का मान जाए, अगर उस व्यक्ति को मृत्युदंड का सामना करना पड़ सकता है और अगर निष्पक्ष सुनवाई को लेकर कोई भी चिंता है तो भारत इन आधारों पर इस मांग को ठुकरा सकता है। भले ही कोई औपचारिक शरण कानून न हो लेकिन इसके बावजूद भी भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 सभी व्यक्तियों के लिए जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को पक्का करता है।
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