नई दिल्ली। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस Yashwant Varma ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनके सरकारी आवास से कथित तौर पर कैश मिलने के विवाद और महाभियोग की प्रक्रिया के बीच अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई जज महाभियोग या जांच के दबाव में पद छोड़ चुके हैं।
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जस्टिस पी. डी. दिनाकरण:
मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पीडी दिनाकरण पर तमिलनाडु में अवैध जमीन कब्जाने और आय से ज्यादा संपत्ति रखने के आरोप थे। इसके बाद महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही उन्होंने 2011 में इस्तीफा दे दिया था।
जस्टिस सौमित्र सेन:
कोलकाता हाई कोर्ट के जज सौमित्र सेन पर रिसीवर रहते हुए 33 लाख रुपये से ज्यादा की हेरा फेरी का आरोप लगा था। उनके खिलाफ पारित महाभियोग भारत में किसी न्यायाधीश के खिलाफ पहला सफल महाभियोग था लेकिन लोकसभा में सुनवाई से पहले ही उन्होंने 2011 में इस्तीफा दे दिया था।

जस्टिस वी. रामास्वामी:
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस वी. रामास्वामी पर आरोप था कि उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश रहते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया था। 1991 में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था जो पास नहीं हो सका। यह प्रस्ताव भारत में किसी सुप्रीम कोर्ट जज के खिलाफ पहला महाभियोग प्रस्ताव था।हालांकि बढ़ते दबाव के बीच उन्होंने 1994 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
जस्टिस दिलीप बी. भोसले:
हैदराबाद हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी. भोसले पर प्रशासनिक अनियमितताओं और पक्षपात के आरोप लगे थे। हालांकि औपचारिक जांच नहीं हुई थी, लेकिन विवादों के बीच उन्होंने 2018 में अपने रिटायरमेंट के दिन ही इस्तीफा दे दिया था।
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