डेस्क। देश भर में रसोई गैस यानी एलपीजी की सप्लाई और बढ़ती कीमतों को लेकर मची अफरातफरी के बीच आम आदमी अब खाना पकाने के वैकल्पिक तरीकों की ओर मुड़ रहा है। इसी कड़ी में इंफ्रारेड कुकटॉप (Infrared Cooktop) ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है और कई शहरों में इसकी मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है।
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बिजली की खपत पूरी तरह से कुकटॉप की ‘वाट क्षमता’ और आपके इस्तेमाल करने के तरीके पर निर्भर करती है। आमतौर पर बाजार में मिलने वाला 2000 वाट (W) का इंफ्रारेड कुकटॉप, यदि एक घंटे तक अपनी पूरी क्षमता यानी ‘हाई पावर’ पर चलाया जाए तो यह लगभग 1.5 से 2 यूनिट (kWh) बिजली खर्च करता है। हालांकि, सामान्य तौर पर खाना पकाते समय हम तापमान को कम-ज्यादा करते रहते हैं, इसलिए औसत खपत 1 से 1.5 यूनिट प्रति घंटा के बीच रहती है।

अगर आपके क्षेत्र में बिजली की दर 7 से 8 रुपये प्रति यूनिट है, तो एक घंटे कुकिंग करने का खर्च करीब 10 से 16 रुपये के बीच आएगा। इंडक्शन सीधे बर्तन को गर्म करता है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी बहुत कम होती है। दूसरी ओर इंफ्रारेड कुकटॉप पहले अपनी ऊपरी सतह को गर्म करता है और फिर वह गर्मी बर्तन तक पहुंचती है।
इंफ्रारेड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस पर इंडक्शन की तरह खास चुंबकीय बर्तनों की जरूरत नहीं होती; आप इस पर मिट्टी, एल्युमीनियम या कांच का कोई भी समतल बर्तन इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि आप महीने भर के खर्च की तुलना करें, तो एलपीजी सिलेंडर के मुकाबले इंडक्शन या इंफ्रारेड कुकटॉप का इस्तेमाल करने पर 20 से 30 प्रतिशत तक की बचत की जा सकती है।
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