नई दिल्ली। ओम बिरला के खिलाफ नो कॉन्फिडेंस मोशन को लेकर बढ़ते तनाव के बीच लोकसभा स्पीकर का पद एक बार फिर से चर्चा में आ चुका है। फिलहाल हम आपको बताते हैं कि लोकसभा स्पीकर का पद कितना ताकतवर होता है और ओम बिरला के पास कितनी पावर है?
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Lok Sabha Speaker लोकसभा की सभी बैठकों की अध्यक्षता करता है और यह पक्का करता है कि कार्यवाही तय पार्लियामेंट्री नियमों के मुताबिक ही चले। अक्सर बहस वाले सदन में ऑर्डर को बनाए रखना स्पीकर की बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है। स्पीकर के पास संसद के सदस्यों को गलत व्यवहार करने के लिए सस्पेंड करने या फिर उन्हें सदन से बाहर जाने का निर्देश देने का अधिकार होता है। ऐसा इसलिए ताकि माहौल ठीक रहे।

स्पीकर ही यह तय करते हैं कि किन मुद्दों या फिर बिलों पर चर्चा होगी और सदस्यों को समय देते हैं। स्पीकर को मिली सबसे ताकतवर संवैधानिक अथॉरिटी में से एक यह तय करना है कि कोई बिल मनी बिल के तौर पर क्वालीफाई करता है या फिर नहीं। संविधान के तहत यह फैसला आखिरी होता है और इसे किसी भी कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता।
संविधान के दसवें शेड्यूल के तहत स्पीकर के पास दलबदल से जुड़े मामलों पर फैसला लेने का अधिकार होता है। अगर कोई एमपी पार्टी बदलता है या फिर पार्टी का अनुशासन तोड़ता है तो स्पीकर यह तय करता है कि उस सदस्य को डिसक्वालिफाई किया जाना चाहिए या फिर नहीं। स्पीकर के तौर पर कार्यवाही के दौरान वोट नहीं कर सकते लेकिन अगर किसी खास मुद्दे पर रूलिंग पार्टी और अपोजिशन पार्टी के बीच टाई हो जाता है तो स्पीकर वोटिंग कर सकता है।
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