नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेकर विपक्ष ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने संसदीय व्यवस्था से जुड़े कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम को और अहम बना देता है लोकसभा के डिप्टी स्पीकर का खाली पद। मौजूदा लोकसभा में अब तक डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति नहीं हो सकी है।
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आम तौर पर स्पीकर (Speaker) की अनुपस्थिति में डिप्टी स्पीकर सदन की कार्यवाही संभालते हैं लेकिन जब यह पद ही खाली हो तो स्थिति संवैधानिक रूप से संवेदनशील हो जाती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 95(2) के तहत, अगर लोकसभा के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर दोनों के पद खाली हों, तो राष्ट्रपति किसी एक लोकसभा सदस्य को यह जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। इस सदस्य को आमतौर पर स्पीकर प्रो टेम कहा जाता है।

स्पीकर प्रो टेम का काम नए सांसदों को शपथ दिलाना और नई लोकसभा के पहले सत्र की कार्यवाही चलाना होता है। जब तक नया स्पीकर नहीं चुना जाता, तब तक वही सदन की कार्यवाही संचालित करता है। अगर सत्र के दौरान अस्थायी रूप से स्पीकर और डिप्टी स्पीकर मौजूद न हों, तो स्पीकर द्वारा नामित चेयरपर्सन्स के पैनल में से कोई सदस्य सदन की अध्यक्षता कर सकता है।
यह पैनल लोकसभा के नियम 9 के तहत बनाया जाता है। हालांकि यह व्यवस्था आमतौर पर अस्थायी अनुपस्थिति के लिए होती है, न कि लंबे संवैधानिक विवाद के लिए। जो भी सदस्य सदन की अध्यक्षता करता है, चाहे वह स्पीकर प्रो टेम हो या पैनल का कोई चेयरपर्सन, उसके पास कार्यवाही चलाने के सभी प्रक्रियात्मक अधिकार होते हैं। वह नियमों के अनुसार बहस की अनुमति देता है, व्यवस्था बनाए रखता है और सदन की गरिमा सुनिश्चित करता है।
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