नई दिल्ली। विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ No-Confidence Motion लाने की तैयारी में जुट चुका है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने विपक्ष के नेता को सदन में बोलने के मौके नहीं दिए और साथ ही कार्यवाही के संचालन में भी पक्षपात दिखाया है। इसी बीच आइए जानते हैं कि अतीत में ऐसे प्रस्ताव कब लाए गए थे?
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हाल ही में कांग्रेस और कई विपक्षी पार्टियों ने ओम बिरला के खिलाफ एक प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। विपक्षी नेताओं के मुताबिक यह फैसला बार-बार होने वाले व्यवधान, बोलने की चुनिंदा अनुमति और महिला सांसदों के साथ भेदभाव पूर्ण व्यवहार के आरोपों की वजह से लिया गया है।
इससे पहले लोकसभा स्पीकर के खिलाफ पहला अविश्वास प्रस्ताव 18 दिसंबर 1954 को भारत के पहले स्पीकर जी वी मावलंकर के खिलाफ लिया गया था। यह प्रस्ताव विपक्षी नेता सुचेता कृपलानी और बाकी सांसदों द्वारा पेश किया गया था। कई मजबूत तर्कों के बावजूद भी प्रस्ताव निर्णायक रूप से हार गया। एक और प्रयास 1966 में हुकुम सिंह के खिलाफ हुआ था। उन्होंने राजनीतिक रूप से अशांत दौर में सेवा की थी। विपक्षी पार्टियों ने उन पर पक्षपात पूर्ण आचरण का आरोप लगाया लेकिन प्रस्ताव सफल नहीं हो सका।

आठवीं लोकसभा के दौरान 1987 में बलराम जाखड़ के खिलाफ भी कदम उठाया गया था। उस समय राजनीतिक तनाव काफी ज्यादा था लेकिन प्रस्ताव को पारित होने के लिए पर्याप्त समर्थन ही नहीं मिल सका। जाखड़ अपने पद पर बने रहे। जिस वजह से यह पैटर्न मजबूत हुआ कि ऐसे प्रस्ताव शायद ही कभी असल में पद से हटाने में बदलते हैं। लोकसभा स्पीकर को हटाने का नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 (c) के तहत आता है।
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