नई दिल्ली। भारत के लोकतंत्र में राष्ट्रीय पार्टी का टैग प्रतीकात्मक नहीं होता बल्कि यह एक कानूनी मान्यता, राजनीतिक विश्वसनीयता और कई व्यावहारिक फायदे लेकर आता है। यह दर्जा देने का अधिकार भारत के चुनाव आयोग के पास है। इसने साफ और मापने योग्य मानदंड तय किए हैं। आइए जानते हैं कि कोई भी संगठन एक नेशनल पार्टी कब बनता है?
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यदि किसी भी राजनीतिक पार्टी को कम से कम चार अलग-अलग राज्यों में राज्य पार्टी के रूप में मान्यता मिलती है तो वह अपने आप National Party का दर्जा पाने योग्य हो जाती है। एक और जरूरी मानदंड आम चुनाव में प्रदर्शन है। किसी भी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता दी जा सकती है अगर वह लोकसभा में कुल सीटों का कम से कम दो प्रतिशत जीतती है।

हालांकि यह सांसद कम से कम तीन अलग-अलग राज्यों से होनी चाहिए। इससे यह साबित होता है कि पार्टी की अपील किसी एक भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। तीसरा रास्ता संसदीय सफलता के साथ वोट शेयर पर केंद्रित है। अगर कोई पार्टी 4 या ज्यादा राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल वैध वोटों का काम से कम 6% हासिल करती है और कम से कम चार लोकसभा सीट भी जीतती है, तो वह राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता के लिए योग्य हो जाती है।
राष्ट्रीय पार्टी होने के सबसे बड़े फायदे में से एक स्थायी और विशेष चुनाव चिन्ह है जो पूरे देश में मान्य होता है। यह चिन्ह किसी दूसरी पार्टी को नहीं दिया जा सकता। इससे मतदाताओं को मत पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर पार्टी को आसानी से पहचानने में मदद मिलती है। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा चुनावी प्रक्रियाओं को काफी ज्यादा आसान बना देता है।
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