नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा देने के लिए एक अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार किया है। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच tariff और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना, बाजार पहुंच बढ़ाना और भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी BTA की नींव रखना है। यह ढांचा जल्द लागू किया जाएगा।
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राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर 25 फीसद के अतिरिक्त शुल्क को हटाने की घोषणा की है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि भारतीय निर्यातकों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के दरवाजे खुलेंगे। भारत में अमेरिका से आने वाले मशीनरी, इलेक्ट्रोनिक्स, फल, ड्राई फ्रूट्स, सोयाबीन तेल, शराब आदि की कीमतें घटेंगी क्योंकि इन पर अब कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा।

भारत के जिन उद्योगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा उसमें आटोमोबाइल, विमानन पुर्जे, जेनेरिक दवाइयां और रत्न व आभूषण है। टेक्सटाइल, चमड़ा, जूता, रबर, रसायन, घरेलू सामान के आयात पर अमेरिका में 18 फीसद का टैक्स लगाया जाएगा जो जुलाई, 2025 से पहले लगाये गये शुल्क की दर से ज्यादा है। लेकिन यह दर एशिया में भारत के अन्य प्रतिस्पर्द्धी देशों जैसे विएनताम, चीन, बांग्लादेश आदि से ज्यादा है, तो यहां भी भारतीय निर्यातकों को फायदा मिलने की संभावना है।
इसके साथ ही भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, तकनीकी सामान और कोकिंग कोल खरीदने को तैयार हुआ है। दोनों देश टेक्नोलॉजी कारोबार को नई ऊंचाई देने पर भी सहमत हुए हैं।खासकर डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले जीपीयू और अन्य उन्नत तकनीकी उत्पादों में व्यापार और सहयोग बढ़ाया जाएगा।
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