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Tuesday, February 10, 2026

साइबर क्राइम के शिकार हो रहे डॉक्टर-इंजीनियर जैसे पढ़े-लिखे लोग, क्या है वजह?

डेस्क। साइबर अपराधियों का सबसे आम मकसद पैसा कमाना होता है। आजकल ज्यादातर हमले इसलिए किए जाते हैं ताकि उनसे फायदा कमाया जा सके। रोज सैकड़ों ऐसी खबरें आ रही हैं जिनमें लोग अपनी मेहनत की कमाई साइबर अपराधियों के हाथों गवां रहे हैं। ऐसा नहीं है कि अनपढ़ या कम पढ़े लिखे लोग ही अपनी कमाई गवां रहे हैं, अच्छे खासे पढ़े-लिखे लोग साइबर अपराधियों (cyber crime) का शिकार बन रहे हैं।

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डिजिटल अरेस्ट के अधिकांश मामलों में ईडी के नाम को हथियार बनाया जाता है। ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ईडी ने आम लोगों को सतर्क करने के लिए कई अहम जानकारियां अपने वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी किया है। ईडी के एक्स हैंडल पर तो डिजिटल अरेस्ट से बचाव के लिए बकायदा डिटेल पिन किया हुआ है। यानी आप जब ईडी के एक्स हैंडल पर जाएंगे, सबसे पहला पोस्ट आपको डिजिटल अरेस्ट वाला ही दिखेगा।

ईडी के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधी नकली समन भेजते हैं। फर्जी समन असली की तरह ही दिखते हैं। ऐसे में आम लोग असली-नकली का फर्क समझ नहीं पाते हैं। असली-नकली की पहचान के लिए बकायदा ईडी ने एक क्यूआर कोड भी जारी किया है। आप उसमें फर्जी समन की पहचान कर सकते हैं।

सीबीआई, ईडी हो या फिर संचार कंपनियां, इनके द्वारा लोगों को साफ-साफ यह बताया जा चुका है कि डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून देश में है ही नहीं। समय-समय पर डिजिटल अरेस्ट के मामले सामने आ रहे हैं और लोग ठगे जा रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट करने के लिए साइबर अपराधी विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की फेक आईडी का सहारा ले रहे हैं।

Tag: #nextindiatimes #cybercrime #DigitalArrest

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