नई दिल्ली। Parliament का बजट सत्र शुरू होते ही सदनों में हंगामे और अनुशासन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 28 जनवरी यानी बुधवार को सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई लेकिन पहले ही दिन भारी शोर-शराबे और विरोध के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही गुरुवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी थी।
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ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठते हैं कि संसद की कार्यवाही के दौरान नियमों का उल्लंघन करने सांसदों के खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है। अगर कोई सांसद कार्यवाही के दौरान लगातार बातचीत करता है, नारे लगाता है या जानबूझकर सदन का कामकाज रोकता है तो इसे कदाचार माना जाता है। ऐसे मामलों में सांसद को सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया जा सकता है या चेतावनी दी जाती है।

संसद में लगातार नियम तोड़ने या अव्यवस्था फैलाने पर सांसद को निलंबित भी किया जा सकता है। निलंबन की अवधि आमतौर पर शेष सत्र तक होती है। निलंबित सांसद न तो सदन में बैठ सकता है, न सवाल पूछ सकता है और न ही किसी समिति की बैठक में हिस्सा ले सकता है। इसे संसद की सबसे गंभीर सजाओं में गिना जाता है।
संसद की कार्यवाही शुरू करने का अधिकार सभापति के पास होता है लेकिन किसी सांसद को निलंबित करने का अंतिम फैसला सदन करता है। संसदीय कार्य मंत्री या कोई अन्य मंत्री इस संबंध में प्रस्ताव रखता है जिस पर सदन की मंजूरी जरूरी होती है। अगर सांसद का व्यवहार सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाता है या बार-बार कार्यवाही बाधित करता है तो उस पर विशेषाधिकार उल्लंघन का आरोप भी लग सकता है।
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