डेस्क। UGC के विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री कल चर्चा का विषय रहे। लखनऊ विश्वविद्यालय में भी इसे लेकर छात्रों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने UGC के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। आईये समझते हैं कि क्या है यह नया नियम और देश भर में क्यों मचा है इस पर बवाल?
यह भी पढ़ें-भारत-EU के बीच हुई सुपर डील, जानें कौन सी चीजें होंगी सस्ती
यूजीसी के इन नए नियमों के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘इक्विटी’ यानी समानता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। बताया जा रहा है की, यूजीसी के नए इक्विटी रेगुलेशंस 2026 का मकसद कॉलेजों में धर्म, जाति, जेंडर और बैकग्राउंड के आधार पर होने वाले भेदभाव को जड़ से खत्म करना है। इसके तहत हर यूनिवर्सिटी में एक कंप्लेंट सेल बनाना जरूरी होगा, जो स्टूडेंट्स की शिकायतों का तुरंत निपटारा करेगा।

नियमों में साफ है एडमिशन और हॉस्टल आवंटन में पूरी तरह से ट्रांसपेरेंसी बरतनी होगी ताकि, सभी स्टूडेंट्स को समान अवसर मिलें। इसके साथ ही इन नियमों को न मानने वाले संस्थानों की सरकारी फंडिंग रोकी जा सकती है और उन पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
जानकारों का कहना है कि, इन नियमों के बहाने सरकार यूनिवर्सिटी के काम करने के तरीके में दखल दे रही है। उनका मानना है कि कॉलेजों को अपने फैसले खुद लेने की आजादी होनी चाहिए, जो इन नियमों से छिन सकती है। सबसे ज्यादा विरोध उस प्रावधान का हो रहा है जिसमें नियम न मानने पर संस्थानों की सरकारी फंडिंग (Grants) रोकने और उन पर भारी जुर्माना लगाने की बात कही गई है। ऐसे कड़े नियमों से छात्रों के बीच और समाज में भेदभाव की खाई और गहरी हो जाएगी।
Tag: #nextindiatimes #UGC #UGCRegulations2026




