नई दिल्ली। हर साल Budget वाले दिन एक तस्वीर सबसे ज्यादा देखी जाती रही है वित्त मंत्री और उनके हाथ में एक खास लाल रंग का ब्रीफकेस। अब सवाल यह है कि आखिर बजट के साथ लाल रंग का रिश्ता कहां से जुड़ा? क्या ये सिर्फ एक परंपरा थी या इसके पीछे सत्ता, इतिहास और सोच की कोई गहरी कहानी छुपी है?
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भारत में बजट और लाल रंग का संबंध सीधे ब्रिटिश शासन से जुड़ा है। ब्रिटेन में सदियों से सरकारी, कानूनी और वित्तीय दस्तावेजों को लाल रंग के कवर में रखा जाता था। वहां लाल रंग को सत्ता, अधिकार और गंभीर फैसलों का प्रतीक माना जाता था। जब भारत में अंग्रेजों ने प्रशासनिक ढांचा खड़ा किया, तो उन्होंने बजट जैसी अहम आर्थिक फाइलों के लिए भी उसी परंपरा को अपनाया।

भारत का पहला बजट 1860 में पेश किया गया था। उस समय देश पूरी तरह ब्रिटिश शासन के अधीन था और प्रशासनिक नियम भी अंग्रेजों के ही थे। तभी से बजट को लाल कवर या लाल ब्रीफकेस में रखने की परंपरा शुरू हुई। आजादी के बाद भी यह परंपरा दशकों तक चलती रही और लाल ब्रीफकेस बजट की पहचान बन गया।
बजट में लाल रंग सिर्फ दिखावे के लिए नहीं चुना गया था। इसे जिम्मेदारी, शक्ति और गंभीरता का प्रतीक माना जाता है। बजट ऐसा दस्तावेज होता है जिसमें देश की कमाई, खर्च, टैक्स, योजनाएं और आर्थिक दिशा तय होती है। ऐसे में लाल रंग यह संकेत देता था कि यह फाइल बेहद महत्वपूर्ण है और इससे जुड़े फैसले पूरे देश को प्रभावित करेंगे। समय के साथ लाल ब्रीफकेस सिर्फ सरकारी परंपरा नहीं रही, बल्कि आम लोगों की नजर में बजट का प्रतीक बन गया है।
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