नई दिल्ली। हर साल की तरह इस साल भी पद्म पुरस्कारों (Padma Shri) की घोषणा हो चुकी है। इसमें पुरस्कार पाने वालों की पहली सूची जारी की गई है। इसी बीच आइए जानते हैं कि यह पदक असल में कहां बनाए जाते हैं और सरकार इन पर कितना खर्च करती है?
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सभी पद्म पुरस्कार पदक कोलकाता में अलीपुर मिंट में बनाए जाते हैं। यह मिंट वित्त मंत्रालय के तहत एक सरकारी कंपनी, सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के तहत काम करता है। यही मिंट भारत रत्न पदक बनाने के लिए भी जिम्मेदार है। हर पदक पर कमल का निशान और देवनागरी और अंग्रेजी में शिलालेख होते हैं।
हालांकि यह पुरस्कार काफी ज्यादा प्रतिष्ठित हैं लेकिन यह ठोस सोने या फिर चांदी के नहीं बने होते। पद्म विभूषण पदक मुख्य रूप से कांस्य का बना होता है। इस पदक के दोनों तरफ प्लैटिनम की सजावट होती है। पद्म भूषण भी कांस्य का बना होता है लेकिन इसके सजावटी तत्वों पर सोने की परत चढ़ी होती है। इसी के साथ पद्मश्री भी कांस्य का ही बना होता है जिसमें स्टेनलेस स्टील की सजावट होती है।

सरकार पद्म पुरस्कार के पदकों को बनवाने की सटीक लागत सार्वजनिक रूप से नहीं बताती क्योंकि मेडल सरकार के स्वामित्व वाली टकसाल के अंदर ही बनाए जाते हैं। सरकार अवार्ड पाने वालों को यात्रा में छूट, पेंशन या फिर कोई खास सुविधा नहीं देती है। पद्म पुरस्कार भारत के बड़े सामाजिक दायरे में सेवा, बलिदान, रचनात्मक और उत्कृष्ट को सम्मानित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। वैज्ञानिकों और कलाकारों से लेकर डॉक्टर शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ताओं तक यह पुरस्कार एक राष्ट्रीय सम्मान को दर्शाता है।
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