लखनऊ। उत्तर प्रदेश… एक ऐसा नाम जो रोजमर्रा में इतना आम है कि शायद ही कोई इसके पीछे की कहानी पर ध्यान देता हो, लेकिन जब राज्य के बंटवारे और पूर्वांचल जैसे नए राज्यों की मांग फिर से तेज होती है, तब यह सवाल अपने आप उठता है कि आखिर इस प्रदेश का नाम उत्तर प्रदेश ही क्यों रखा गया?
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Uttar Pradesh नाम रखने की सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति थी। यह राज्य भारत के उत्तरी हिस्से में स्थित है, इसलिए ‘उत्तर’ शब्द जोड़ा गया। ‘प्रदेश’ का मतलब क्षेत्र या राज्य होता है यानी उत्तर दिशा में स्थित राज्य होता है। यह नाम सरल था, आसानी से समझ में आने वाला था और पूरे देश के लिए एक साफ पहचान बनाता था।
आर्यावर्त, मध्य देश या ब्रह्मर्षि देश जैसे नाम ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण थे लेकिन इन्हें आधुनिक प्रशासन के लिए उपयुक्त नहीं माना गया। आजाद भारत एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहता था, जहां नाम सरल, गैर-विवादित और भौगोलिक रूप से स्पष्ट हों। ‘उत्तर प्रदेश’ इस कसौटी पर पूरी तरह खरा उतरता था।

एक और वजह यह भी मानी जाती है कि ‘उत्तर प्रदेश’ नाम, पुराने अंग्रेजी नाम यूनाइटेड प्राविंसेज के शुरुआती अक्षरों UP से मेल खाता था। इससे नाम बदलने के बावजूद पहचान में ज्यादा उलझन नहीं हुई और प्रशासनिक कामकाज भी आसान रहा। आज के उत्तर प्रदेश को प्राचीन काल में अलग-अलग नामों से जाना जाता था। वैदिक युग में यह इलाका ब्रह्मर्षि देश और मध्य देश कहलाता था। बाद के दौर में इसे आर्यावर्त भी कहा गया। मुगल काल में यह क्षेत्र किसी एक नाम से नहीं जाना गया, बल्कि प्रशासनिक सुविधा के लिए इसे कई हिस्सों में बांट दिया गया।
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