एंटरटेनमेंट डेस्क। 50 के दशक में एक ऐसी actress आईं, जो भारतीय सिनेमा की पहली ऐसी अदाकारा थीं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में सम्मानित किया गया था। वह अपने दौर की सबसे महंगी अभिनेत्रियों में से एक थीं। लेकिन महज एक फिल्म के फ्लॉप होने की उन्होंने खुद को ऐसी सजा दी कि पूरी दुनिया से नाता ही तोड़ लिया।
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हम जिस दिग्गज अभिनेत्री की बात कर रहे हैं, उन्होंने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि बंगाली सिनेमा में भी खूब नाम कमाया था। 6 अप्रैल 1931 को एक बंगाली परिवार में जन्मीं सुचित्रा सेन को बचपन से ही अभिनय में गहरी दिलचस्पी थी। उनके परिवार का दूर-दूर तक एक्टिंग या फिल्मों से कोई नाता नहीं था, फिर भी उन्होंने सिनेमा जगत में वो मुकाम हासिल किया जो सदियों तक याद रखा जाएगा।

सुचित्रा सेन की स्कूलिंग पाबना सरकारी गर्ल्स हाई स्कूल से हुई, लेकिन साल 1947 में विभाजन के कारण उनका पूरा परिवार पश्चिम बंगाल में आकर बस गया। सुचित्रा सेन ने हिंदी और बंगाली सिनेमा में 61 से ज्यादा फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। कहा जाता है कि स्टारडम के कारण वह अपने परिवार और पति को समय नहीं दे पा रही थीं। इस वजह से पति-पत्नी के बीच दूरियां बढ़ीं।
साल 1978 में सुचित्रा सेन ने एक बंगाली फिल्म में काम किया, जिसका टाइटल था ‘प्रनोय पाशा’। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस बुरी तरह से फ्लॉप रही और सुचित्रा सेन ने हमेशा के लिए इंडस्ट्री को बाय-बाय कर दिया। 36 साल तक वह एक ही कमरे में बंद रहीं और उनके परिवार के सीमित लोगों को ही उनसे मिलने की इजाजत थी। 17 जनवरी साल 2014 को एक्ट्रेस का हार्ट अटैक से निधन हो गया।
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