लाइफस्टाइल डेस्क। मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले आने वाला लोहड़ी का त्योहार फसल की कटाई से जुड़ा है। Lohri के दौरान आग जलाना और उसमें खाने की चीजें डालना एक आम दृश्य है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हम ऐसा क्यों करते हैं? आइए विस्तार से समझते हैं।
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लोहड़ी की जलती अग्नि में पॉपकॉर्न, मूंगफली, रेवड़ी और गुड़ जैसी चीजें डालने का एक विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह कार्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका है। माना जाता है कि ऐसा करके लोग अपने बीते हुए कल को पीछे छोड़ते हैं और नई उम्मीदों के साथ नए साल को गले लगाते हैं। अग्नि के चारों ओर इकट्ठा होकर लोग अपने जीवन में समृद्धि और खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।

पुरानी मान्यताओं के अनुसार अग्नि देवता को रेवड़ी, मूंगफली और फुल्ले यानी पॉपकॉर्न अर्पित करना जीवन में ‘गुड लक’ या सौभाग्य लेकर आता है। चूंकि, यह त्योहार खेती और फसल से जुड़ा है, इसलिए इन खाद्य पदार्थों को आग में डालना प्राकृतिक तत्वों के प्रति सम्मान दिखाने का एक रूप है। किसान और आम लोग प्रार्थना करते हैं कि अग्नि देवता आने वाले कृषि मौसम में उन पर अपनी कृपा बनाए रखें।
लोहड़ी पर खाए जाने वाले पॉपकॉर्न सिनेमा हॉल के बटर वाले पॉपकॉर्न से काफी अलग और सेहतमंद होते हैं। यह कम कैलोरी वाला स्नैक फाइबर और पॉलीफेनोल्स से भरपूर होता है, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करता है। यह लो-फैट और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है। त्योहार के बाद आप इन पॉपकॉर्न को और ज्यादा पौष्टिक बनाने के लिए उन्हें मसालों, तेल, सोया या कढ़ी पत्ते के साथ भून सकते हैं।
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