एंटरटेनमेंट डेस्क। 80 के दशक में यूं तो कई हीरोइनें हिंदी सिनेमा में आ रही थीं इसी बीच आईं Talluri Rameshwari। सांवली-सलौनी, सिंपल, सादा और सरल स्वभाव वाली तल्लूरी जब आईं तो वो हर डायरेक्टर और एक्टर की पहली पसंद बन गईं। साल 1977 में तल्लूरी रामेश्वरी ने फिल्म दुल्हन वही जो पिया मन भाए से अपने करियर की शुरूआत की थी।
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इस फिल्म में उन्होंने कम्मो का किरदार निभाया। बड़ी बात ये थी कि वो पहली ही फिल्म से छा गईं। रातोंरात तल्लूरी को इस फिल्म से स्टारडम हासिल हो गया। इसके बाद वो तेलुगू फिल्म सीतामालक्ष्मी में काम किया था और इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था।
तल्लूरी रामेश्वरी हिंदी सिनेमा में आते ही छा गईं। उन्हें बड़े-बड़े फिल्ममेकर्स फिल्मों के ऑफर्स देने लगे। साल 1980 में उन्होंने फिल्म आशा में काम किया। इस फिल्म में जीतेंद्र के साथ नजर आईं। फिल्म में उन्होंने जीतेंद्र की पत्नी माला का किरदार निभाया और इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड का नोमिनेशन भी मिला।

अच्छी फिल्में चल रही थीं और काम भी खूब मिल रहा था। इसी बीच तल्लूरी रामेश्वरी की जिंदगी में एक दर्दनाक मोड़ आया। दरअसल साल 1979 की बात है और उस वक्त तल्लूरी रामेश्वरी एक फिल्म सुनैना की शूटिंग कर रही थीं। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान तल्लूरी रामेश्वरी को घोड़े पर बैठकर एक सीन शूट करना था। वो शूटिंग कर रही थीं कि अचानके से वो घोड़े से गिर गईं और उनकी एक आंख से खून बहने लगा। इस हादसे ने तल्लूरी की जिंदगी में सब बदल दिया। उनके हाथ से कई फिल्में निकल गईं और ऑपरेशन के बाद उनकी एक आंख छोटी हो गई।
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