एंटरटेनमेंट डेस्क। कम उम्र में सिंगिंग, एक्टिंग और डांस की दुनिया में नाम कमाने वाले Elvis Presley की जिंदगी कभी-कभी आसान नहीं रही। वक्त-वक्त पर जिंदगी ने उनकी परीक्षा ली। प्रेस्ली अपनी मां के काफी करीब रहे थे। वह अक्सर उनके साथ चर्च की प्रेयर्स में शामिल होते थे। चर्च ही वह जगह थी, जहां से एल्विस प्रेस्ली की म्यूजिक की तरफ रूचि बढ़ी थी।
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साल 1941 में एल्विस प्रेस्ली का ईस्ट टुपेलो कंसोलिडेटेड स्कूल में पहली क्लास में दाखिला हुआ। उनकी टीचर ने उन्हें एवरेज स्टूडेंट समझा। हालांकि, साल 1945 वह साल था, जब उन्होंने सबका नजरिया बदल दिया। महज 10 साल की उम्र में उन्होंने मिसिसिपी अलबामा फेयर और डेयरी शो में एक सिंगिंग कांटेस्ट में भाग लिया, जहां उन्होंने ‘ओल्ड शीप’ गाया और वह उस कांटेस्ट में पांचवें नंबर पर आए।

1946 में उनका दाखिला मिलाम में हुआ, उस वक्त वह छठी क्लास में थे। वह स्कूल में गिटार बजाते और गाना गाते थे। उन्हें अक्सर लोकल संगीत बजाने के लिए ‘बेकार’ बच्चा कहकर स्कूल में स्टूडेंट्स बुली करते थे। साल 1953 में अगस्त का वह महीना, जिसने एल्विस प्रेस्ली की जिंदगी को बदल कर रख दिया। मेम्फिस के सन स्टूडियो में एल्विस ने अपनी मां के लिए पहला गाना ‘माय हैप्पीनेस’ रिकॉर्ड किया। जिस भाव से एल्विस ने ये गाना गाया, स्टूडियो के असिस्टेंट मैरियन कीस्कर भी हैरान रह गए।
साल 1954 में फिलिप्स ने उन्हें जिमी स्वीनी के गाने ‘विदआउट यू’ ट्रायल के लिए बुलाया। एल्विस प्रेस्ली एक ऐसे सिंगर थे, जिन्हें महज 36 साल की उम्र में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। अपने पूरे करियर में 700 से अधिक गाने गा चुके एल्विस प्रेस्ली को तीन बार ग्रेमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
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