डेस्क। उत्तर भारत में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। खासतौर पर मैदानी इलाकों में प्रदूषण और कोहरे के मेलजोल से बने स्मॉग के चलते लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में लगातार Cold Day की खबरें आपने पढ़ी और सुनी होंगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोल्ड डे किसे कहते हैं?
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जब दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से काफी कम हो जाता है, तो ऐसी स्थिति को कोल्ड डे कहा जाता है। मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 16°C या उससे कम हो जाए, तो कोल्ड डे घोषित किया जाता है। कोल्ड डे रात के न्यूनतम तापमान पर नहीं, बल्कि दिन के अधिकतम तापमान पर आधारित होता है। कोल्ड डे की स्थिति में बहुत ज्यादा ठंड के कारण लोगों को दिन में भी ऊनी गर्म कपड़े पहनने पड़ते हैं।

मैदानी और पहाड़ी इलाकों के लिए कोल्ड वेव के पैमाने अलग-अलग हैं। मैदानी इलाकों में अगर किसी वेदर स्टेशन पर न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस या उससे कम रहे या फिर यह सामान्य तापमान से 4.5 डिग्री से लेकर 6.4 डिग्री सेल्सियस तक कम हो तो ये स्थिति शीत लहर कहलाएगी। इसके अलावा अगर न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस या उससे कम दर्ज हो तब भी कोल्ड वेव मानी जाती है।
अगर मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान गिरकर 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए या फिर न्यूनतम तापमान में सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गिरावट दिखे। पहाड़ी इलाकों में अगर न्यूनतम तापमान शून्य या उससे नीचे हो जाए तो कोल्ड वेव मानी जाती है। इसके अलावा अगर न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से लेकर 6.4 डिग्री सेल्सियस तक कम हो तब भी कोल्ड वेव की स्थिति होती है।
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