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Tuesday, March 17, 2026

क्यों रखा जाता है सकट व्रत और कौंन हैं सकट माता, मंगल ग्रह से है खास कनेक्शन

डेस्क। आज अंगारकी संकष्‍टी चतुर्थी है। माघ महीने के कृष्‍ण पक्ष की चतुर्थी को सकट चौथ कहते हैं जो 6 जनवरी 2026 को मंगलवार के दिन पड़ने के कारण अंगारकी संकष्‍टी चतुर्थी है। जब चतुर्थी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं। अंगारकी शब्‍द मंगल ग्रह को दर्शाता है।

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दरअसल एक बार मंगल ग्रह ने गणेशजी को प्रसन्‍न करने के लिए कठोर तपस्‍या की। तब गणेश जी ने प्रसन्‍न होकर आशीर्वाद दिया कि जब कोई चतुर्थी मंगलवार को पड़ेगा तो वह व्रत करने से साधक को विशेष फल मिलेगा। मंगल अग्नि तत्‍व वाले ग्रह हैं, इसलिए उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं।

Sakat Vrat माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। उत्तर भारत में इसे विशेष रूप से माताएं संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए करती हैं। यह व्रत संतान की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस दिन सकट माता और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं और रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।

सकट माता देवी दुर्गा का ही एक रूप हैं। उन्‍हें चौथ माता भी कहते हैं। उन्‍हें बच्‍चों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि सकट माता की पूजा करने से बच्चों पर आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही बच्‍चे का जीवन सुखी और समृद्धशाली होता है। साथ ही सकट चौथ के दिन सकट माता के साथ ही भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है। सकट माता के राजस्थान में कई मंदिर हैं। जिनमें बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

Tag: #nextindiatimes #SakatVrat #SakatChauth2026

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